Sunday, February 14, 2010

अवतार बनाम अमरकंटक

दो दिनों पहले मुझे एक निजी कार्यक्रम में अमरकंटक जाने का मौका मिला। यह सौ•ााग्य ही था कि पिछले महीनों में पूरी दुनिया में धूम मचाने वाली हालीवुड फिल्म अवतार देखने के बाद मैं वहां गया था। पेंड्रारोड से बस में सफर के दौरान घाटियों के बीच से गुजरते हुए मुझे इस फिल्म के खूबसूरत और हैरत अंगेज नजारों जैसा दृश्य दिखाई दिया। ठसाठस •ारी बस में सफर करते हुए रास्तों के साथ गुजर रहे स्थानों का पता तो नहीं चल पाया लेकिन मेरी आंखों ने जो मंजर देखा वे उस फिल्म के दृश्यों से धड़ाधड़ उन्हें जोड़ती चली गई। नर्मदा का उद्गम स्थल घूमने के बाद अवतार का नजारा एक बार फिर कपील धारा और दूध धारा जलप्रपात की ओर जाते हुए दिखाई दिया। सड़क के दोनों ओर पतले लेकिन अत्यधिक लंबे वृक्षों की श्रृंखला ने जहां उन्हें निहारते रहने और उनकी गरिमा को अंदर से महसूस करने पर मजबूर किया वहीं घने वृक्षों से आक्षादित पर्वत प्रदेश हजार फीट नीचे गिरती कपील धारा फिल्म के दृश्यों से कम नहीं थे। बीहड़ रास्तोें से गुजरते वक्त पूरे समय मैं अपने आपको कहीं न कहीं फिल्म के आदिवासी किरदार सा महसूस करता रहा। छत्तीसगढ़Þ में •ाी ऐसे दृश्यों की कमी नहीं है। बस्तर में केशकाल घाटी, अबुझमाड़ के बीहड़, कवर्धा में चिल्फी घाटि और •ोरम देव के आस पास का जंगल, कोरबा में पाली लाफा और उसके आसपास के इलाकों में अवतार सी खूबसूरत वादियां और उसको संजोने वाले लोग आज •ाी अपनी प्राकृतिक अवस्था में रहते हैं। जरूरत है इनको संरक्षण देने की।